देशभक्ती गीत
यह धरती है ऐसे वीरों कि
यहाँ कमी न कोई शुरों कि
पल पल मैं आँहे, भरता हूँ
इस् धरती को वंदन करता हूँ
हर वीर यहाँ अलबेला है
हर एक आग का गोला है
इस् गोले को स्फुर्तीं, देता हूँ
इस् धरती को वंदन करता हूँ
बेटी भी यहाँ अलबेली है
दुश्मन के लिये एक गोली है
फख्र मैं इनपर, करता हूँ
इस् धरती को वंदन करता हूँ
कई धर्म यहाँ अलबेले हैं
लोहड़ी होली के मेले हैं
इन् मेलों मे हर पल, जिता हूँ
इस् धरती को वंदन करता हूँ
सरहद पर बैठे फौजी हैं
हर एक यहाँ मनमौजी हैं
पल भर भी नही मै, सोता हूँ
इस् धरती को वंदन करता हूँ
शिवा चौधरी
15ऑगस्ट15
जामनेर , जळगांव
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