*_हिंदी अभंग_*
बता दे ईश्वर
बता मेरे अल्ला
कैसे होगा भला
इंसानो का....
कोई पढे वेदं
कोई तो कुराण
फिर भी विराण
बुद्धी लागे.....
किसीं हात झेंडा
किसीं हात दंडा
राजनीती फंडा
जाने ना वो....
पताकों का रंग
यहा निला पिला
देह पर चोला
काके हरा...
चाल चले कोई
कटे मरे कोई
बदनामी भये
पताकों की.....
बता मेरे राम
कैसा यह खेला
विषैली ये बेला
बोये कौन ?.....
*_- वास्तव_*