सोमवार, 25 जनवरी 2016

हिंदि हास्य कविता

हास्य कविता

एक दिन वह बोली
सुनाओ कुछ ऐसा
उडने लगू पिया मैं
परीयों के जैसा

मैने कहा राणि तुम
परीयों सा उड न पाओगी
सुनकर मेरी कविता
जलभून जाओगी

उसने कहा मुझसे
चलो कैसे भी सुनाओ
और् सुना न पाओ तो
अपनी शकल दफा कराओ

मैने कहा मुझपर
शक न करो जानम
आवो बैठकर सुनेंगे
कुछ नया हम

है थोडी मोटी जरुर
पर है बडी प्यारी प्यारी
रंग उसका है गोरा
पर अकल की है वह मारी

चाहे मै चिढ़ाऊ कितना
रहती हर दम कूल है
अंग्रेजी का ई ना जाने
ऐसी ब्लडीफूल है

अंग्रेजी का नाम सुनकर
चूप कराया मुझको ऐसा
जैसे वह मारने वाली भैंस
मै उसका गरिब भैसा

सुन कर मेरी बात को
वह लगी हसने
मैने कहा क्यो हसती हो
ऐसा क्या है ईसमे

उसने कहा जानम
क्या कविता सुनायी ऐसी
वाकयी मे शकल तुम्हारी
है काले झोटे जैसी

उसे चिढ़ाने गया
पर खुद ही मुह की खायी
कौन सा मुहरत था वह यारों
जो ऐसी चुड़ैल ब्याहकर लायी

© शिवा चौधरी
       जलगांव,महाराष्ट्र

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