गुरुवार, 14 जनवरी 2016

अंश

अंश

मै मेरे पापा का अंश
कभी न भूलूंगा मै खुद को,
चाहे छूलू लाख बुलंदी
भूलूंगा न अपने वजूद को……

भूल जाते है जो वजूद
वह स्वार्थी कहलाते है,
झूठे अहंकार में वह
बस चूरचूर हो जाते है……

न बिसराओ यारों जीवन में
जहॉ जिये थे उन गलियारों को,
आज तुम बनकर सयाने
सताओ न किसी दुखीयारों को ……

भाँती भाँती लोग यहा पर
भाँती भाँती ही ख्याल होंगे,
गर लढाओंगे पेच बातों के
मुफ्त मे यहाँ बवाल होंगे ……

शब्दों से जीतोगे दुनिया
शब्दो मे ही ऐसा अंश है,
शब्द होते मधुर शहद से
शब्द ही जहरिले दंश हे ……

©शिवा चौधरी
    जामनेर जळगांव

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