सीमा सुरक्षा बल
सुनो सुनाऊ सुनो दोस्तो
यह बल है ऐसा सानी
सीमा सुरक्षा बल कि तुमको
आवो सुनाऊ कहानी - 2
सन् पैंसठ के अतं में
एक रूप नया बना था,
सीमा सुरक्षा बल यह नाम यारों
इसके लिये चुना था ।
खेल कूद हो या हो लढाई
या हो आतंकवाद मिटाना,
दुनिया के हर कोने ने
इसके नाम को जाना ।
चौबिसो घंटे अपनायें
हर मौसम कि रवानी,
सीमा सुरक्षा बल कि तुमको
आवो सुनाऊ कहानी - 2 ।। 1 ।।
शेरों सा दहाडता
हर जवान आया ऐसा,
अलग अलग है प्रांत उसका
पर है दसदस के जैसा ।
जीवन का यह यारों
ऐसा एक जुवां है,
खोकर अपने शेरों को
इसने दर्द सहा है ।
न्यौछावर कर दि इन्होने
देशपर अपनी यह जवानी
सीमा सुरक्षा बल कि तुमको
आवो सुनाऊ कहानी - 2 ।। 1 ।।
हो हिमालय कि चोंटी
या हो गुजरात कि दलदल,
निगाहें ताने बैठा है
हर जवान उसका हरपल ।
जुता वर्दि बंदूक यारों
है इनका श्रृंगार,
लगती है मासुम आँखे
पर बरसाते है अंगार ।
चौकन्नी है निगाहें इसकी
कर न पायेंगे कोई मनमानी
सीमा सुरक्षा बल कि तुमको
आवो सुनाऊ कहानी - 2 ।। 3 ।।
कोई हिंदू कोई मुस्लिम
कोई सिख ईसाई,
आपस का तुम प्यार देखो
जैसे भाई भाई ।
ईद दिवाली, लोहडी ख्रिसमस
संग संग ईसने मनाया,
दुश्मनो के छक्के छुडाने
हर मौका ईसने भुनाया ।
फर्ज के आगे कोई न करता
यहा पर आना कानी
सीमा सुरक्षा बल कि तुमको
आवो सुनाऊ कहानी - 2 ।। 4 ।।
©शिवा चौधरी
जामनेर,जळगांव
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