बाटा है इन्सान को
कहा से आया कैसे आया
ना समझ उस नन्ही सी जान को,
क्यों बाटा किसने बाटा मैं क्या जानू
पर बाटा हैं इन्सान कों.....|| धृ ||
कोई करता मुंडन उसका
कोई खतने की चिड़िया दिखाता हैं ।
कोई मुंडवाये दाढ़ी मुछे
कोई बाल लंबे रखवाता हैं ।
भले बटे हो चंद धर्मों में
ना बाँटो हिंदूस्थान कों,
क्यों बाटा किसने बाटा मैं क्या जानू
पर बाटा हैं इन्सान कों.....1
एक कहे अल्लाह बड़ा हैं
दुजा कहे ईश्वर का बोलबाला हैं ।
अरे एक ही तो हैं अल्लाह ईश्वर
बस चोला उनका निराला हैं ।
लाल हरे चोलो में ना तुम
बाँटो उस भगवान कों,
क्यों बाटा किसने बाटा मैं क्या जानू
पर बाटा हैं इन्सान कों.....2
सियासत का रंग गलियों में
मजहब के झंडो में दिखता हैं ।
इन्सानों के संग संग यारों
ईमान यहाँ पर बिकता हैं ।
चंद रुपयों के ख़ातिर भाई
बेचो ना ईमान कों,
क्यों बाटा किसने बाटा मैं क्या जानू
पर बाटा हैं इन्सान कों.....3
धर्म तो धर्म में छोड़ो
लोग जात-पात में भी बटते हैं ।
सांप्रदायिकता के नाम यहापर
इन्सान मुफ़्त मे कटते हैं ।
यूँ ना गवाओं मुफ़्त मे अपनी
बेशकिमती जान कों,
क्यों बाटा किसने बाटा मैं क्या जानू
पर बाटा हैं इन्सान कों.....
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